3 अप्रैल 2025 का दिन भारतीय संसद के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ रहा है। वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025, जो कल देर रात लोकसभा में 288-232 वोटों से पास हुआ, अब राज्यसभा में अपनी अगली चुनौती का सामना करने को तैयार है। दोपहर 1 बजे से शुरू होने वाली बहस इस बिल के भविष्य को तय करेगी। लेकिन यह बिल है क्या? यह क्यों इतना चर्चा में है? और इससे आम जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? आइए, इसकी परतें खोलते हैं और हर पहलू को समझते हैं।
एक नई शुरुआत: बिल का जन्म और मकसद
वक्फ (संशोधन) विधेयक का पहला मसौदा अगस्त 2024 में सामने आया था। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने फरवरी 2025 में अपनी रिपोर्ट दी, और अब यह अपडेटेड रूप में संसद में है। सरकार इसे वक्फ बोर्ड में सुधार का मास्टरस्ट्रोक बताती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “यह बिल गरीब मुस्लिमों, महिलाओं और बच्चों के हक की रक्षा करेगा।” उनका दावा है कि यह वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकेगा और पारदर्शिता लाएगा। लेकिन विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर चोट मानता है। तो सच्चाई क्या है? चलिए बदलावों को देखते हैं।
बदलावों का पूरा लेखा-जोखा
यह बिल वक्फ एक्ट 1995 में 40 से ज्यादा बदलाव लाता है। यहाँ हर प्रमुख संशोधन को विस्तार से समझते हैं:
1. गैर-मुस्लिमों का प्रवेश: नया समावेश
- अब वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल होंगे। कम से कम दो सदस्य हिंदू, सिख, ईसाई या अन्य समुदाय से होंगे।
- क्यों?: सरकार का कहना है कि यह प्रशासन को निष्पक्ष बनाएगा। मिसाल के तौर पर, अगर कोई जमीन का विवाद है, तो गैर-मुस्लिम सदस्य तटस्थ नजरिया देंगे।
- विवाद: विपक्ष पूछता है कि क्या गैर-मुस्लिम वक्फ की भावनाओं को समझ पाएँगे? क्या यह धार्मिक मामलों में दखल नहीं है?
2. “वक्फ बाय यूज़” का अंत: कागजों की सख्ती
- पहले कोई जमीन अगर सालों से मस्जिद या कब्रिस्तान के लिए इस्तेमाल होती थी, तो उसे वक्फ मान लिया जाता था। अब यह नियम खत्म होगा।
- क्या होगा?: सिर्फ वही संपत्ति वक्फ होगी, जिसके पास वैध वक्फनामा या दस्तावेज़ होंगे। बिना कागज की संपत्ति खारिज होगी।
- मकसद: फर्जी दावों और पुराने झगड़ों को खत्म करना।
- चिंता: विपक्ष कहता है कि पुरानी मस्जिदों और कब्रिस्तानों का क्या होगा, जिनके पास दस्तावेज़ नहीं हैं?
3. जिला कलेक्टर की नई ताकत
- अब जिला कलेक्टर यह तय करेगा कि कोई संपत्ति वक्फ की है या नहीं। पहले यह हक सिर्फ वक्फ बोर्ड के पास था।
- कैसे?: कलेक्टर दस्तावेज़, इतिहास और मौजूदा हालात देखेगा। अगर जमीन सरकारी या निजी निकली, तो वक्फ का दावा रद्द होगा।
- लक्ष्य: बोर्ड की मनमानी पर लगाम और आम लोगों को राहत।
- विरोध: विपक्ष इसे स्वायत्तता पर हमला मानता है। क्या कलेक्टर पक्षपात नहीं करेगा?
4. सेंट्रल डेटाबेस: हर संपत्ति की निगरानी
- सभी वक्फ संपत्तियों को एक केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा।
- विवरण: देश की 8.7 लाख वक्फ संपत्तियों का डेटा यहाँ होगा। हर राज्य में नोडल ऑफिसर इसे लागू करेगा। रजिस्ट्रेशन न हुआ, तो संपत्ति मान्य नहीं।
- फायदा: अवैध कब्जे और गड़बड़ी रुकेगी।
- मुश्किल: छोटे वक्फ संस्थानों के पास तकनीक और संसाधन की कमी हो सकती है।
5. महिलाओं को हक: समानता की ओर कदम
- बोर्ड में कम से कम दो महिलाएँ होंगी, और उनकी विरासत का अधिकार सुरक्षित होगा।
- क्या बदलेगा?: पहले कई बार महिलाओं को वसीयत से बाहर कर दिया जाता था। अब उन्हें बराबरी मिलेगी।
- उद्देश्य: लैंगिक न्याय और गरीब मुस्लिम महिलाओं का सशक्तिकरण।
- सवाल: क्या यह सिर्फ कागजी बदलाव है, या जमीन पर असर दिखेगा?
6. दान पर सख्ती: वापसी का रास्ता बंद
- एक बार दान की गई संपत्ति को वापस लेने का अधिकार खत्म होगा।
- कैसे?: पहले दानकर्ता या वारिस शर्तों के साथ संपत्ति माँग सकते थे। अब यह हमेशा वक्फ की रहेगी।
- लक्ष्य: दुरुपयोग और कानूनी झगड़े रोकना।
- चिंता: दान देने वाले हिचकिचाएँगे, भरोसा टूट सकता है।
7. पुराने दावों की छानबीन
- पुराने वक्फ दावों की जाँच होगी, और नए दावों के लिए 5 साल की समय-सीमा होगी।
- विवरण: 50-100 साल पुरानी संपत्तियों की वैधता देखी जाएगी। नए दावे 5 साल में साबित न हुए, तो खारिज।
- मकसद: लंबित विवाद सुलझाना।
- खतरा: पुराने दस्तावेज़ न होने से वैध संपत्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
संसद में हंगामा: लोकसभा से राज्यसभा तक
2 अप्रैल को लोकसभा में 12 घंटे की बहस हुई। राहुल गांधी ने इसे “मुस्लिमों के खिलाफ साजिश” कहा, तो सोनिया गांधी ने इसे “जबरदस्ती थोपा गया” बताया। ओवैसी और अखिलेश ने भी विरोध किया। सरकार ने जवाब दिया कि यह सुधार है, न कि हस्तक्षेप। आज राज्यसभा में 8 घंटे की बहस होगी। NDA के 125 सांसद बहुमत से ऊपर हैं, लेकिन विपक्ष प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई की तैयारी में है।
जनता का नजरिया
- हाँ में: कुछ मुस्लिम संगठन इसे गरीबों के लिए फायदेमंद मानते हैं।
- ना में: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य इसे स्वायत्तता पर हमला कहते हैं। प्रदर्शन की योजना है।
क्या होगा आगे?
अगर राज्यसभा में बिल पास होता है, तो यह राष्ट्रपति के पास जाएगा और 2025 में लागू हो सकता है। यह वक्फ व्यवस्था को बदल देगा, लेकिन सवाल बाकी है – क्या यह सुधार है या राजनीति? जवाब आज शाम तक मिलेगा।